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22 November 2019

अंत की प्रतीक्षा में.......

एक समय
आता है
एक समय
जाता है
अपने भीतर
बहुत से
दर्द समेटे
खुशियां समेटे
क्षणिक सुखों के
कुछ सूक्ष्म
पलों के बाद
दुनियावी मेला
छँट सा जाता है
और हम में  से
हर कोई
नये आरंभ की
प्रत्याशा में
गिनता रहता है
आती-जाती साँसें
अपने अंत की
प्रतीक्षा में।

-यश ©
22/11/2019

08 November 2019

जल ही जीवन है.......

जल ही जन है
जल ही मन है
.
जल ही जीवन है।
.
जल जल कर
जलता मानव
जल जल कर ही
बनता दानव ।
.
जलते जलते यूं ही चल कर
थक कर कहीं रुकता मानव ।
.
जल ही कर्ता
जल ही धर्ता
मीनों के हर
दु:ख का हर्ता।
.
जल ही अर्पण
जल ही प्रण है
.
जल ही जीवन है।

-यशवन्त माथुर ©
08/11/2019

24 October 2019

दो दो आसमां .......

एक ये भी ....... है
एक वो भी आसमां है। 
.
ये ज़मीं से ऊपर है
वो सितारों से नीचे है।
.
एक आसमां
सिरहाने तकिये के
कहीं चैन की नींद सोता है
एक आसमां
किसी चौराहे पर
सरेआम रोता है। 
.
एक आसमां
मन की रारों का है
या नदी के किनारों का है
एक आसमां
सरहदों पर लगे
कँटीले तारों का है।
.
एक आसमां
थोड़ा तुम्हारा है 
थोड़ा हमारा है
एक आसमां में सिर्फ
फिज़ाओं  का बँटवारा है।
.
-यश ©
20/10/2019 


20 October 2019

कुछ कह न सका.....

अफसोस ये कि दिल से कुछ कह न सका,
अफसोस ये कि दिल की कुछ सुन न सका।
यूँ तो राही बनके आया था इस जहां में मगर,
कदम कमज़ोर ये ही थे कि ठीक से चल न सका।
.
-यश©
17/10/2019

08 October 2019

दशहरा मना कर क्या होगा ?

मर न सका जो रावण मन का
पुतले जला कर क्या होगा ?
अज्ञानी थे,अज्ञानी हैं हम
दशहरा मना कर क्या होगा ?

मन के भीतर अंधकार हमारे
मर रहे संस्कार हमारे
केवल कागज़ी सिद्धांतों का
नारा लगाने से क्या होगा ?

एक रंग का लहू है भीतर
तलवार चलाने से क्या होगा?
बन न सके जो इंसान अभी तक
दशहरा मना कर क्या होगा ?

-यश ©
06/10/2019
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