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10 January 2019

क्यूँ भूलूँ , क्यूँ याद करूँ ......

क्यूँ भूलूँ , क्यूँ याद करूँ
क्यूँ किसी से फरियाद करूँ
आते जाते हर लम्हे को
ऐसे ही क्यूँ बर्बाद करूँ ?

माना कि कल तुम्हारा था
माना कि कल तुम्हारा है
आज के मायाजाल में क्यूँ
खुद पे अत्याचार करूँ ?

अपनी बातें कहूँ मैं किस से
परछाईं को भी नफरत मुझ से
ऐसे कैसे गहन तमस पर
क्यूँ पूरा विश्वास करूँ ?

क्यूँ भूलूँ , क्यूँ याद करूँ
क्यूँ किसी पर परिवाद करूँ
अपनी राह के हर काँटे का
ऐसे क्यूँ तिरस्कार करूँ ?

-यश©
10/01/2019

05 January 2019

गुब्बारे ......

कितनी ही साँसों को
खुद में समाए
कितने ही गमों को भुलाए
किलकारियों पर इठलाते
आसमान में
उड़ते जाते
सबकी खुशियों की
डोर से बंधे
रंग-बिरंगे
गुब्बारे
बस मुस्कुराते ही रहते हैं
खामोशी से
कुछ-कुछ
कहते ही रहते हैं।
ये गुब्बारे
धर लेते हैं रूप
कभी उल्लास की
लड़ियों का
कभी दीवारों पर सज कर
बन जाते हैं गवाह
अनगिनत महफिलों का।
अपनी साँसों के टूटने तक
ये गुब्बारे
रखते हैं महफूज
और आबाद
उन क्षणिक स्वप्नों को
जो हम बुनते हैं
दिन के उजाले में
खुली आँखों से
आने वाले हर पल को
बस यूं ही
जी लेने के लिए।
.
यश ©
05/01/2019




03 January 2019

जिंदगी तूफानी है ......

अनसुने किस्से कहीं,
कहीं अनसुनी कहानी है
ज़िंदगी तूफानी है।

बोझिल नीरस साँसें कहीं
कहीं परवाज़ सुहानी है
ज़िंदगी तूफानी है।

लहरें ऊंची उठ रहीं कहीं
कहीं सागर की शांत जवानी है
ज़िंदगी तूफानी है।

सन्नाटे की आहट कहीं
कहीं अक्स को ही हैरानी है
ज़िंदगी तूफानी है।

-यश©
03/01/2019

01 January 2019

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!

खिलें कलियाँ खुशियों की जो
बन कर फूल न कभी मुरझाएँ।
नए वर्ष के हर एक दिन में
सभी चलें कभी न रुक पाएँ।

जीवन एक संघर्ष है माना
कम हो जाएँ पथ के काँटे।
एक थे, हम यूं  रहें एक ही
खुद को भी न खुद से बाँटें।

जलें बातियाँ दीयों की जो
रंग जीवन के सदा दिखाएँ। 
नए वर्ष के हर एक दिन में
मुस्कुराहटें ही मिलती जाएँ।
.
-यशवन्त माथुर ©
01/01/2019




22 December 2018

खबर की तलाश में.........

खबर की तलाश में,बन गया खबर ही खुद
बा खबर था लापता, बे खबर रहा न कुछ।

बात कोई नयी कहते हुए,काँटों पर चलते हुए
फूलों पर सोते हुए, नये ख्वाब कुछ बुनते हुए। 

बूझता पहेलियाँ रहा, खुद के अक्स पर छपता रहा
अँधेरों में भटकता रहा, हर शख्स को खटकता रहा।

हल की तलाश में, मिल रहा छल-बल  न खुद
बेहाल हो कर गिर पड़ा,ताबूत में मिला न कुछ।
.
-यश ©
22/12/2018

 


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