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12 January 2011

आज कुछ धूप खिली है

(चित्र गूगल से साभार)
बहुत दिनों बाद
मौसम ने करवट ली है 
आज कुछ धूप खिली है 

छंट  गयी कोहरे की चादर 
एक नयी ऊर्जा मिली है 
आज कुछ धूप खिली है

 चहक उठे परिंदे भी 
उफ्फ! आलस्य से मुक्ति मिली है 
आज कुछ धूप खिली है 

आज कुछ धूप खिली है 
कल के मुरझाये हुए पत्तों को 
शायद कुछ राहत मिली है 

आज कुछ धूप खिली है.

19 comments:

  1. सच मै दोस्त अब थोड़ी सी तो धूप खिली है !
    सच कहू सबके चेहरे मै थोड़ी सी मुस्कान दिखी है !
    शब्दों का बहुत ही खुबसूरत ताना बाना !
    बधाई दोस्त

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  2. बातो हो बातो में सुंदर कथन

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  3. धूप खिला दी आपने बैठे बिठाये

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  4. आज कुछ धूप खिली है
    कल के मुरझाये हुए पत्तों को
    शायद कुछ राहत मिली है
    आज कुछ धूप खिली है.
    .....सबको ही धूप का इन्तजार है .....
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  5. @ नीरज जी यहाँ लखनऊ में तो आज दिन में अच्छी धूप निकली बस इसीलिए ब्लॉग पर भी धूप खिला दी :)

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  6. चहक उठे परिंदे भी
    उफ्फ! आलस्य से मुक्ति मिली है
    आज कुछ धूप खिली है
    aha ... shareer bhi sugbugane laga , banate hain kuch chatpata

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  7. सुन्दर वर्णन ।
    बधाई !

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  8. आज हमारे यहाँ भी धुप दिखी थी...

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  9. सर्दी की नरम धूप का प्यारा वर्णन ......

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  10. सबको ही धूप का इन्तजार है
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  11. इसे कहते हैं ताजी रचना। बहुत सुन्दर प्रस्तुति|

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  12. बधाई धूप के खिलने के लिए..सर्दियों में धूप सभी को अच्छी लगती है .
    सुन्दर कविता .

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  13. सक्रांति ...लोहड़ी और पोंगल....हमारे प्यारे-प्यारे त्योंहारों की शुभकामनायें......

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  14. मकर संक्रांति, लोहरी एवं पोंगल की हार्दिक शुभकामनाएं...

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  15. इन पंक्तियों को पसंद करने के लिए आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद.

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  16. बहुत सुंदर रचना...

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  17. मकर संक्रांति की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

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  18. धूप खिली रहे!
    सुन्दर रचना!

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