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27 May 2011

फिर आया तूफ़ान

फिर आया तूफ़ान
सांय सांय करती
तेज हवा
के  साथ
गिरते  उखड़ते
पेड़
मानो
नष्ट हो रहा हो
धरती का
नख शिख सौंदर्य !

आँखों में चुभती
उड़ती धूल
के  साथ
सब कुछ
अस्त व्यस्त
कुछ पल को
ठहरा सा जीवन
धीमी पड़ती रफ्तार

और -
तूफ़ान के
निकल जाने के बाद
फिर वही दोहराव
फिर वही रफ्तार
कुछ पल ठहरी सोच
कुछ पल का पश्चाताप
तूफ़ान के बाद की
बारिश में
कहीं बह जाता है .

हर बार की तरह
मैं 
समझना नहीं चाहता
इन तूफानों के
अर्थ को.

26 comments:

  1. मानो
    नष्ट हो रहा हो
    धरती का
    नख शिख सौंदर्य !

    असह्य वेदना ....
    जीवन समझना...

    हर बार की तरह
    मैं
    समझना नहीं चाहता
    इन तूफानों के
    अर्थ को.

    और फिर आगे बढ़ना ...
    सुंदर कविता ...
    बधाई आपको ...

    ReplyDelete
  2. तूफ़ान के
    निकल जाने के बाद
    फिर वही दोहराव
    फिर वही रफ्तार
    कुछ पल ठहरी सोच
    कुछ पल का पश्चाताप
    तूफ़ान के बाद की
    बारिश में
    कहीं बह जाता है .

    हर बार की तरह
    मैं
    समझना नहीं चाहता
    इन तूफानों के
    अर्थ को.
    .......main bhi nahin samajhna chahti

    ReplyDelete
  3. हर बार की तरह
    मैं
    समझना नहीं चाहता
    इन तूफानों के
    अर्थ को....

    हर तूफान के पीछे हमेशा दबाव छुपा होता है ...... बहुत सुन्दर रचना

    ReplyDelete
  4. फिर आया तूफ़ान
    फिर आया तूफ़ान
    सांय सांय करती
    तेज हवा
    के साथ
    गिरते उखड़ते
    पेड़
    मानो
    नष्ट हो रहा हो
    धरती का
    नख शिख सौंदर्य……. सुन्दर मनो भाव…….बधाई

    ReplyDelete
  5. तूफ़ानो के अर्थ समझ भी कहाँ आते हैं।

    ReplyDelete
  6. हर तूफ़ान के बाद शायद हम इंतज़ार करते हैं एक और तूफ़ान का ... सुन्दर कविता !

    ReplyDelete
  7. वाह जी बहुत सुंदर
    बल्ले बल्ले

    ReplyDelete
  8. yashwant ji abhi pichhle dino jo aandhi toofan aaye hain ve aapki kavita se fir se yatharth ho gaye.bahut khoob...

    ReplyDelete
  9. फिर आया तूफ़ान
    फिर आया तूफ़ान
    सांय सांय करती
    तेज हवा
    के साथ
    गिरते उखड़ते
    पेड़
    मानो
    नष्ट हो रहा हो
    धरती का
    नख शिख सौंदर्य

    sach me ek pyari see rachna....
    prakriti ne sab kuchh diya hai..ek jeevan to ek tuffaan bhi...:)

    ReplyDelete
  10. हर बार की तरह
    मैं
    समझना नहीं चाहता
    इन तूफानों के
    अर्थ को....

    अपने अपने स्वार्थों की आपाधापी में कौन समझना चाहता है तूफानों का अर्थ...बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति...

    ReplyDelete
  11. tofano ke samay me aapki prastuti sakar swaroop me tufano ko badhne ke liye prerit kar rahi hai.jab koi inka itna sundar varnan karega to kya inko rokna sambhav hoga.bahut sunder.

    ReplyDelete
  12. जीवन में आने वाले तूफ़ान रफ़्तार धीमी कर देते हैं लेकिन जीवन आगे चलता रहना चाहिए है..तूफानों की परवाह किये बिना..चलते रहिये

    ReplyDelete
  13. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (28.05.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

    ReplyDelete
  14. हर बार की तरह
    मैं
    समझना नहीं चाहता
    इन तूफानों के
    अर्थ को....

    तूफ़ानो के अर्थ हम समझ भी कहाँ पाते हैं....
    ये तूफ़ान हैं, कि फिर से आ जाते हैं....
    सुन्दर रचना...

    ReplyDelete
  15. कुछ पल ठहरी सोच
    कुछ पल का पश्चाताप
    तूफ़ान के बाद की
    बारिश में
    कहीं बह जाता है ...

    Reality of our lives !!

    ReplyDelete
  16. उत्तम शब्द संयोजन

    ReplyDelete
  17. गुत्थी तो तूफानों के अर्थ समझने के बाद ही सुलझेगी , यूं पलायन से नहीं |

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  18. नव-निर्माण करने को ,पुरातन को ले जाने को आयी आंधी
    सतत चलने वाले जीवन की ,याद दिलाने को आयी आंधी
    अगर हम से बड़े स्थान नहीं खाली करेंगे ,तब की सोचो
    तुम्हारी नयी पीढ़ी की नयी पौध ,कैसे विस्तार पा सकेगी ....
    तो प्रिय यशवन्त ,ये सब भी याद दिलाने को आयी आंधी ......
    शुभकामनायें.....

    ReplyDelete
  19. गहन अभिव्यक्ति लिए कविता ...उम्दा रचना

    ReplyDelete
  20. bhut hi sunder shabdo aur bhaavo ko racha hai apne.. very nice...

    ReplyDelete
  21. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद.

    ReplyDelete
  22. तूफ़ान ....मौसम की तरह मानव जीवन का एक शाश्वत सत्य , जो बहुत कुछ विनष्ट करता है और संवारता भी है |


    भावमयी सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  23. तूफ़ान, तूफ़ान की तरह आता है और तूफ़ान की तरह ही चला जाता है और इससे पहले कि हम समझ सकें कि क्या हुआ, दुनिया बदल चुकी होती है..
    सत्य कहा आपने...

    आभार
    सुख-दुःख के साथी पर आपके विचारों का इंतज़ार है..

    ReplyDelete

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