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16 November 2011

मेरा इंतज़ार

जंगली धूप और
मरघटी रातों मे
अनजान गलियों की ,
सुनसान  सड़कों पर
अकेले चलते हुए
मैंने देखा -
हर मोड़ पर कर रहे थे
मेरा इंतज़ार
वक़्त के
अदृश्य पहरेदार!

42 comments:

  1. हर मोड़ पर कर रहे थे
    मेरा इंतज़ार
    वक़्त के
    अदृश्य पहरेदार!

    Badhiya:-)

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  2. इंतजार में भी एक अहसास है....भावमयी...

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  3. समय तो भाग रहा है ... साथ ही हमें जगा रहा है

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  4. बेजोड़ रचना...बधाई स्वीकारें



    नीरज

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  5. हर मोड़ पर वक़्त संभावनाओं की पोटली भी पकड़ता जाता है...!

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  6. आपके पोस्ट पर आना सार्थक सिद्ध हुआ । । मेरे पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं । धन्यवाद ।

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  7. वक़्त के पहरेदार यानि आशा, शक्ति, जिजीविषा .... यही तो है वो साथ , जो डरने से हारने से रोकता है

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  8. हर मोड़ पर कर रहे थे
    मेरा इंतज़ार
    वक़्त के
    अदृश्य पहरेदार!
    बहुत सुन्दर भाव... इंतजार करते वक़्त के पहरेदार...

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  9. हर मोड़ पर कर रहे थे
    मेरा इंतज़ार
    वक़्त के
    अदृश्य पहरेदार!
    वाह !!! बहुत खूब

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  10. छोटी किन्तु शानदार पोस्ट वक़्त के पहरेदार......वाह |

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  11. वक्त के पहरेदार से मुलाकात अच्छी रही.. धूप हो या रात वक्त अनवरत हमें सँग लिये जाता है..

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  12. बहुत अच्छी तरह से वक़्त को शब्दों में बयान किया है ।

    अपने महत्त्वपूर्ण विचारों से अवगत कराएँ ।

    औचित्यहीन होती मीडिया और दिशाहीन होती पत्रकारिता

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  13. हर मोड़ पर कर रहे थे
    मेरा इंतज़ार
    वक़्त के
    अदृश्य पहरेदार!
    बहुत सुन्दर

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  14. बहुत खूब ... वक्त तो इंतज़ार करता है पर साथ भी जल्दी छोड़ जाता है अगर कोई साथ न चले तो ...

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  15. वाह ...बहुत खूब ...।

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  16. आपकी पोस्ट बेहद पसंद आई! इसलिए आपको बधाई और शुभकामनाएं!
    आपका हमारे ब्लॉग
    http://tv100news4u.blogspot.com/
    पर हार्दिक स्वागत है!

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  17. हर मोड़ पर कर रहे थे
    मेरा इंतज़ार
    वक़्त के
    अदृश्य पहरेदार!

    ....कि नए और अनुकरणीय पद चिन्ह देखने को मिलेंगे ....बधाई यशवंत जी

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  18. आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है ... नयी पुरानी हलचल पर कल शनिवार 19-11-11 को | कृपया पधारें और अपने अमूल्य विचार ज़रूर दें...

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  19. Your thoughts are reflection of mass people. We invite you to write on our National News Portal. email us
    Email us : editor@spiritofjournalism.com,
    Website : www.spiritofjournalism.com

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  20. वक्त के पहरेदारों को केवल इंतज़ार करना आता और रचनाकार उनके इंतज़ार की भी परवाह नहीं करता. प्यारी कविता.

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  21. बहत बढ़िया ...बधाई

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  22. हर मोड़ पर कर रहे थे
    मेरा इंतज़ार
    वक़्त के
    अदृश्य पहरेदार!
    Badee kamaal kee rachana!

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  23. jangli dhoop se bachkar shaleen chhanv me bhi chaloge to ye pahredaar peechha nahi chhodenge. gahe-bagahe mil hi jayenge.

    sunder abhivyakti.

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  24. सुन्दर रचना

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  25. इसलिए,प्रति पल को उसकी संपूर्णता में जीना ही उपाय।

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  26. यशवंत ...बहुत बहुत ही सुन्दर लिखा है ....

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  27. यशवंत ..बहुत बहुत ही सुन्दर लिखा है ...

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  28. अदृश्य पहरेदार!

    Awesome imagery !!
    Simply loved it :)

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  29. सुंदर कविता, बधाई। कविमन को वेग लेते देख अच्छा लग रहा है।

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