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18 April 2012

अनजान बन जाऊं (ब्लॉग पोस्ट नंबर-300)

कभी कभी सोचता हूँ
हर चीज़ से
हो जाऊं अनजान
खाली सा हो जाऊं
किसी ब्लैंक
सी डी  या डी वी डी
की तरह
और पहुँच जाऊं
कुछ हाथों मे
जो कुछ भी लिख दें
कुछ भी कह दें
अच्छा या बुरा
जो मन मे हो
और मैं
जान जाऊं
मन के भीतर के
दबे हुए
मौन का सच!

39 comments:

  1. मने के उद्‍गार ! बहुत भली लगी आपकी चाह ! बधाई!

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  2. सबके मनका अहसास ...जो कभी न कभी हर दिल में उठता है ...लेकिन कोई इतनी सादगी से समझा नहीं पाता...प्यारा लगा ......

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  3. और मैं
    जान जाऊं
    मन के भीतर के
    दबे हुए
    मौन का सच!

    गहन अंतर्मन कि चाह .....
    सुंदर शब्द
    शुभकामनायें .

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  4. बहुत सुन्दर रचना .....

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  5. डॉ रमेश यादव जी का कहना है-

    पता नहीं क्यों आपका ब्लॉग मेरा कमेन्ट नहीं ले रहा है

    हमेशा मन की ही सुननी चाहिए.मन एक तरह का संकेतक है.उसको जानिए,समझिए और आगे बढ़िए.
    बेहतर सृजन
    शुभकामनाओं सहित !

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  6. बहुत सुंदर यशवंत.....

    इतनी बड़ी बात कैसे आसानी से कह दी...............
    बहुत सहज सी अभिव्यक्ति..........

    खुश रहो...
    सस्नेह
    अनु

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  7. जो मन मे हो
    और मैं
    जान जाऊं
    मन के भीतर के
    दबे हुए
    मौन का सच! ..............sunder abhivyakti ...kash aisa ho jaye .....bhitar ka sab sach samne aa jaye

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  8. और मैं
    जान जाऊं
    मन के भीतर के
    दबे हुए
    मौन का सच....ye sach janna khud ko janna hai ...aur khud ko jan gaye to aasman apni mutthi men hota hai....

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  9. koshish karne men kya harj hae.

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  10. कृपण हृदय ख्वाहिश करे,
    करना चाहे अर्पण ।

    भाव हुए महरूम शब्द से,
    झूठ ना बोले दर्पण ।।

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  11. मन की पीड़ा कुछ ऐसी भी होती है अक्सर.....

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  12. मन के भीतर के
    दबे हुए
    मौन का सच!
    बहुत से प्रश्न अनुत्तरित नहीं रह सकेंगे .... !!

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  13. जान जाऊं
    मन के भीतर के
    दबे हुए
    मौन का सच..mann ki baat sahaj shbdon mein kah daali

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  14. गहन भाव लिए सुंदर प्रस्तुति

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  15. मौन का सच जान लेना इतना आसान !
    - सुन्दर प्रस्तुति.

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  16. बधाई देना तो भूल ही गई थी .... 300 यानी तीसरी सेंचुरी ..... बहुत-बहुत बधाई ..... :)दिन दुनी रात चौगुनी तरक्की हो .... :)))))))))

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  17. मन का सच! बढि़या

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  18. 300 वीं पोस्ट की हार्दिक बधाई। ये मन जो ना कराये कम है।

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  19. why don't you try to write some love poems.

    Love your voice!


    URVASHI

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  20. बहुत सुंदर कविता...बधाई !

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  21. sundar rachna...man to bahut karta hai dusro ka man padhne ka..par agar hum sab ki soch ki parvah karne lage to shayad ji hi nahi payenge...

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  22. बहुत ही सुन्दर यशवंत.....बधाई ३०० वीं पोस्ट के लिए।

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  23. मेल पर प्राप्त -

    indira mukhopadhyay ✆

    10:43 AM

    to me
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है.

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  24. 300 वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई यशवंत भाई

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  25. सबसे पहले तो 300वीं पोस्‍ट के लिए बधाई .. बहुत ही अच्‍छा लिखा है ... शुभकामनाएं

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  26. aap jane pahchaane bane rahe yahi dua hai.. 300th post ke liye Dheron Badhayi aur ujjaval bhavishya ki shubhkamnayen :)

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  27. 300 वीं पोस्ट की बहुत बहुत बधाई यशवंत भाई
    सुन्दर अभिव्यक्ति

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  28. बहुत खूब यशवंत जी , कभी न कभी हम सभी की इच्छा होती है एक शून्य बन जाने की............ सुन्दर अभिव्यक्ति!
    कितना अच्छा होता ,
    जो खाली होता ये मन
    अनंत, अनादि, शून्य गगन सा,
    न कोई हलचल न कोई तड़पन

    पर व्योम नहीं ये तो सिन्धु है,
    भावों के रत्न लिए अंतस में,
    हरदम मंथन को प्रस्तुत,

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  29. शुक्रवारीय चर्चा-मंच पर

    आप की उत्कृष्ट प्रस्तुति ।

    charchamanch.blogspot.com

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  30. Bahut sundar..Sochi sachchi man ki bat ....

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  31. सच कहा आपने जो कुछ अन्दर होता है वह जब बाहर आता है तो मन की बात समझ आने लगती है..
    सुन्दर प्रस्तुति ..
    ३०० वीं पोस्ट के लिए बधाई..

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  32. ३०० वीं पोस्ट के लिए ,यशवंत जी बहुत२ बधाई,..शुभ कामनाए
    बहुत बढ़िया प्रस्तुति,सुंदर अभिव्यक्ति,

    MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: कवि,...

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  33. मन के भीतर के मौन को जानने की चाह भली लगी ...
    तीन सौवीं पोस्ट की बहुत बधाई !

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  34. ३०० वीं पोस्ट के लिए बधाई....

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  35. कुछ शब्दों में गहरी बात ... मौन का अर्थ ...क्या इतना आसान है इसे पाना ...

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  36. वाह बहुत खूब ...सार्थक सोच

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