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21 September 2013

थकान के बाद .......

दिन भर की थकान के बाद
उस मैदान में
पसरी हुई
हरी घास के
नरम बिस्तर पर
जब वो लेटता है
और देखता है
बंद आँखों के भीतर
चमकती दमकती
दुनिया की रंगीनियाँ
और खुली आँखों से
जब महसूस करता है
ऊंचे पेड़ों से गिरती
सूखी पत्तियों का दर्द
तब अचानक ही
मुस्कुरा देते हैं
उसके मजदूर होंठ
क्योंकि
शून्य के
शिखर पर चढ़ कर
वह
नाप चुका होता है
अनंत की
गहरी खाई को। 
~यशवन्त यश©

6 comments:

  1. आपने लिखा....हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल में शामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा {रविवार} 22/09/2013 को जिंदगी की नई शुरूवात..... - हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल – अंकः008 पर लिंक की गयी है। कृपया आप भी पधारें, आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें। सादर ....ललित चाहार

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  2. Bahut Sundar! Manorim ehsaas!

    Saadar
    Madhuresh

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  3. बहुत सुन्दर रचना

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  4. गहरी पंक्तियाँ उन एहसासों से रू-ब-रू कराती हुई जिसे हम बस सोचते है. अति सुन्दर.

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  5. This comment has been removed by the author.

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  6. This comment has been removed by the author.

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