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25 March 2016

बस यूं ही

बस
यूं ही कभी
चलते चलते
थोड़ा रुक कर
सुस्ता कर
एक पड़ाव से
दूसरे पड़ाव की ओर
कंटीले गति अवरोधकों को
लांघ कर
जिंदगी का सफर
जब पहुंचता है
अपने अंत की ओर
तब रह जाता है
सिर्फ घूर घूर कर
देखना
दीये की
लड़खड़ाती -टिमटिमाती
बुझने को बेचैन
लौ की छटपटाहट।

~यशवन्त यश©

12 March 2016

कुछ लोग-36

अंध भक्ति के
रोग से ग्रस्त
कुछ लोग
अंतर नहीं कर पाते
सही और गलत का
कल्पना और
वास्तविकता का
जिंदा और मुर्दा का
आसमान और ज़मीन का .......
ऐसे लोग
हाथ मे सिर्फ लट्ठ लिए
हर पल तलाश मे रहते हैं
उस शिकार की
जो कर नहीं पाता सहन
उनके एकाकी मिथ्या
प्रलाप को......
कुछ लोग
सिर्फ खुद को
खुदा मानते हैं
हर कानून से ऊपर
हर नियम
हर अदालत से ऊपर
सिर्फ वो
उनका लट्ठ
और उनका निर्णय ही
सहिष्णु होता है
और जो वास्तव में
सच होता है
वह उनकी निगाह और
वर्चस्व में
गलत होता है।

~यशवन्त यश©
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