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13 May 2017

अगर यह कविता है तो .......

यह
जो मैंने लिखा
इस ब्लॉग पर
या डायरी पर
अगर सच में कविता है
तो वह क्या है
जो निराला, महादेवी,प्रसाद
गुप्त और दिनकर
लिख गए
वह क्या है
जो उन जैसे
और भी अनेकों
(जिन्हें मैं जानता
या नहीं जानता )
अपनी कलम से
दिमाग से
कल्पनाशीलता और
शब्द शिल्प से
दर्ज़ कर गए
इतिहास में
स्वर्ण अक्षर ?

इसलिए
मेरी नज़र में
यह जो मैं लिखता हूँ
सिर्फ अतिक्रमण है
अंतर्जाल पर
मिली हुई
मुफ्त की सुविधा का
यह कविता नहीं
सिर्फ कुछ पंक्तियाँ हैं
सब जान कर भी
जिन्हें
लिख देता हूँ
मन के इशारे पर
मन के शब्दों में
क्योंकि
अपने मन की
अंधेरी-उजली दुनिया में
मैं आज़ाद हूँ
अपने मन की
करने को और
कहने को।

-यश©
13/05/2017

1 comment:

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