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02 June 2011

आप सब के बीच यह एक साल

आज दो जून है और आज ही के दिन पिछले साल मैंने ब्लॉग लिखना शुरू किया था.हालांकि bloogger.com पर मैंने अगस्त 2008 में ही आई डी बना ली थी.ब्लॉग वास्तव में क्या है यह मुझे नहीं पता था हाँ इतना पता था कि अमिताभ बच्चन जी भी ब्लॉग लिखते हैं और एक दिन मेरा भी ब्लॉग होगा.और यह सपना साकार तब हुआ जब पिछले साल मई में लखनऊ ट्रांसफर न होने और एनुअल अप्रेज़ल से असंतुष्ट हो कर मैंने एक मशहूर रिटेल चेन के कस्टमर सर्विस से रिजाइन कर दिया और पापा की इच्छा और सहमति से घर पर ही अपना साइबर कैफे शुरू कर दिया.28 मई को इस कैफे ने भी एक साल पूरा कर लिया है.

यूँ देखा जाए तो लिख  तो मैं आठ वर्ष की उम्र से रहा हूँ.उसकी भी एक कहानी है.आगरा से निकलने वाले  साप्ताहिक सप्तदिवा में पापा के लेख नियमित रूप से प्रकाशित होते थे.अक्सर पापा अखबारों में छापने वाली बाल कवितायेँ पढ़ कर सुना दिया करते थे.न जाने कहाँ से मेरे मन में यह बात आ गयी कि पापा लेख लिखते हैं मैं कवितायेँ लिखूंगा.मैंने तुकबंदी में एक बे सिर पैर की कविता लिख कर दे दी जिसे संपादक महोदय ने सहर्ष यह कहते हुए कि बच्चे ने लिखा है छपेगा ज़रूर कह कर छाप भी दिया (इसकी प्रति शीघ्र ही पापा के ब्लॉग कलम कुदाल पर उपलब्ध होगी).बस फिर क्या था अखबार में अपना नाम और कविता देख कर तो लिखने का ऐसा चस्का लगा जो अब तक ज़ारी है.

मैं यह स्वीकार करता हूँ कि इतना सब के बावजूद मेरा लेखन ,मेरी कवितायेँ और मेरे लेख मेरे हम उम्र साथियों के समान उच्च स्तर के नहीं है फिर भी यह मेरा सौभाग्य है कि आत्मसंतुष्टि की मेरी इस अभिव्यक्ति को आप विद्वतजन पसंद करते हैं.

जब मैंने ब्लॉग लिखना शुरू किया तब यह नहीं पता था कि हिंदी ब्लॉग जगत काफी विस्तृत है बहुत से लोग ब्लॉग लिखते हैं और उन पर टिप्पणियों के रूप में प्रतिक्रियाएं भी दी जाती हैं.मैंने शुरू में अपनी डायरी में लिखी हुई कविताओं को ब्लॉग पर डालना शुरू किया (हाँ जो मेरा मन कहे शीर्षक से लिखी गयी इस ब्लॉग की सर्वप्रथम कविता मैंने ब्लॉग बनाने के तुरंत बाद लिखी थी.) अब डायरी में लिखी सभी कवितायेँ यहाँ आ चुकी हैं और अब आप मेरी बिलकुल नयी रचनाएं पढ़ रहे हैं जो अधिकतर उसी समय लिख कर पब्लिश की जाती हैं.

जून में ब्लॉग शुरू हुआ और पहला कमेन्ट आदरणीया वीना जी ने लिखा मेरी पोस्ट स्वार्थ पर सितम्बर में .यह मेरे लिये अभी भी एक रहस्य ही है कि उन्हें मेरे ब्लॉग के बारे में कैसे पता चला? उस पोस्ट पर सुरेन्द्र भाम्बू जी,श्री के आर जोशी जी,अजय कुमार जी एवं आनंद पांडे जी के ब्लॉग जगत में स्वागत के भी कमेंट्स मुझे मिले.तब यह एहसास हुआ कि मेरा ब्लॉग भी पढ़ा और देखा जाता है.कमेंट्स करने वालों के प्रोफाइल्स से मुझे उनके तथा उनपर की गयी टिप्पणियों से अन्य ब्लोग्स के बारे में पता चलता गया. 

मैंने जो ब्लोग्स फौलो कर रखे हैं.उन में बच्चों के सभी ब्लोग्स (जिनके बारे में मैं अभी तक जानता हूँ)अनुष्का,पाखी,चैतन्य,रिमझिम,माधव ,लविज़ा ,पंखुरी ,कुहू ,नन्ही परी और हेमाभ के ब्लोग्स मुझे एक अलग ही दुनिया की सैर करा देते हैं.इन बच्चों का उत्साह,इनकी शैतानियाँ,डांस और ड्राइंग्स सभी कुछ बेहतरीन है और इनके मम्मी-पापा और संपादक मंडल को मैं तहे दिल से धन्यवाद देता हूँ इतने अच्छे ब्लोग्स के लिये और इन नन्हे मुन्नों की गतिविधियां हम सब से शेयर करने के लिये.

जहाँ तक बड़ों के ब्लोग्स की बात है तो आदरणीय/आदरणीया प्रमोद जोशी जी,वीना जी,रश्मि जी,अनुपमा पाठक जी,अपर्णा मनोज जी,मोनिका जी,अल्पना वर्मा जी,ज़ाकिर अली जी,प्रमोद ताम्बट जी ,मनोज जी,वंदना जी, आशीष जी, इन्द्रनील जी ,डॉक्टर शरद सिंह जी,तृप्ति जी, निवेदिता जी, मीनाक्षी जी ,अपर्णा त्रिपाठी जी, कैलाश शर्मा जी, माहेश्वरी जी, अनीता जी,अनुपमा सुकृति जी,सत्यम शिवम जी,अंजलि माहिल जी, ज्योति जी,और सुषमा जी के ब्लोग्स एवं लेखन शैली से मैं सर्वाधिक प्रभावित हूँ.इनके ब्लोग्स को पढ़ कर काफी कुछ जानने ,सीखने और समझने को मिलता है.और मेरी भी कोशिश रहती है कि इन्हें पढ़ कर मैं भी अपना स्तर सुधारूं.

बहरहाल आप सभी के स्नेह और आशीर्वाद से इस 203वीं पोस्ट और 87 चाहने वालों के साथ इस ब्लॉग ने एक साल का सफर तय कर लिया है.कल क्या लिखूंगा,कब तक लिखूंगा कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं है बस इस ब्लॉग के नाम को सार्थक करने की कोशिश ज़ारी है.

[विशेष-आज पापा के ब्लॉग का भी एक वर्ष पूरा हो गया है]

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