सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यद्यपि मेरे अपने लिखे का स्तर कहीं भी प्रकाशन योग्य नहीं है, फिर भी यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

Showing posts with label कुछ लोग. Show all posts
Showing posts with label कुछ लोग. Show all posts

15 May 2017

कुछ लोग-38

जीवन के
कदम कदम पर
उधार में डूबे हुए
कुछ लोग
क्या क्या
नहीं कर गुजरते
तगादों से
बचने को ।
घूमते हुए
फिरते हुए 
लेकिन
आखिरकार
जब घिरते हैं
चौतरफा
तब समझ आता है
कि
पल पल की
किश्तों से बेहतर
एक मुश्त लेना
और देना ही है।

-यश©

 

15 October 2016

कुछ लोग-37

कुछ लोग
कुछ लोगों को समझ कर
खुद से नीचा
और खुद को
ऊंचा मान कर
न जाने किस गुमान में
हरदम खोए रह कर
सोए रहते हैं
गहरी नींद में
जो जब टूटती है
तब एहसास दिलाती है
उस अंतर का
जो होता है
घमंड
और स्वाभिमान में
शैतान
और इंसान में
पर उस अंतर को समझने में
हो जाती है कभी कभी देर
कि बस अपने अंधेरे में
खोए रह जाते हैं
कुछ लोग
हमेशा के लिए।

~यशवन्त यश ©

12 March 2016

कुछ लोग-36

अंध भक्ति के
रोग से ग्रस्त
कुछ लोग
अंतर नहीं कर पाते
सही और गलत का
कल्पना और
वास्तविकता का
जिंदा और मुर्दा का
आसमान और ज़मीन का .......
ऐसे लोग
हाथ मे सिर्फ लट्ठ लिए
हर पल तलाश मे रहते हैं
उस शिकार की
जो कर नहीं पाता सहन
उनके एकाकी मिथ्या
प्रलाप को......
कुछ लोग
सिर्फ खुद को
खुदा मानते हैं
हर कानून से ऊपर
हर नियम
हर अदालत से ऊपर
सिर्फ वो
उनका लट्ठ
और उनका निर्णय ही
सहिष्णु होता है
और जो वास्तव में
सच होता है
वह उनकी निगाह और
वर्चस्व में
गलत होता है।

~यशवन्त यश©

11 January 2016

कुछ लोग-35

कुछ लोग
अपनी हर बात
जरूरी समझते हैं
बिना उसकी
तह और गहराई में जाए
सिर्फ किनारे पर
खड़े रह कर
नापना चाहते हैं
भूगोल
नदी और सागर का
पर क्या
सिर्फ बातों से
नापा जा सकता है
सब कुछ ?
कुछ लोग
धरातल पर आए बिना
बस उड़ते रहते हैं
यूं ही
इसी तरह ।

~यशवन्त यश©

03 December 2015

कुछ लोग 34

मतलब
निकल जाने के बाद
अपने मन की
हो जाने के बाद
दोस्त के मुखौटे में छुपे
कुछ दगाबाज लोग
दिखाने लगते हैं
अपने असली रंग ।
उन्हें नहीं मतलब होता
उनके पिछले दौर
और
आज की कठिनाइयों से
उन्हें
सिर्फ मतलब होता है
टांग खींचने से ।
ऐसे लोग
जानते हैं सिर्फ एक ही भाषा
पद,पैसे,
पहुँच और परिचय की
लेकिन नहीं जानते
तो सिर्फ यह
कि आने वाला कल
उनकी ही तरह पलटी मार कर
उनके साथ भी कर सकता है वही
जो वह कर रहे हैं आज
औरों के साथ।

~यशवन्त यश©

30 November 2015

कुछ लोग-33

अपना दिमाग लगाए बिना
फर्जी रिश्तों के जाल में फाँस कर
कभी भाई बना कर
कभी बहन बन कर
कुछ लोग
अपना उल्लू सीधा होते ही
खड़ी कर लेते हैं अपनी दुकान
दूसरों के दिमाग से।
वही अवधारणा
वही परिकल्पना
वही भाषा
वही चेहरे
और वही मोहरे
लेकिन नहीं
तो केवल वह बहाने
वह अवकाश।
वह आज मुक्त हैं
आनंद में हैं
सीधेपन को
बेवकूफी समझ कर
खुद को पीछे रख कर
औरों से भिड़ा कर
कुछ लोग
आज के आनंद में
भूल जाते हैं
अपना बीता हुआ
कल।

~यशवन्त यश©

25 November 2015

कुछ लोग-32

कुछ लोग
बिना लाग लपेट
कह डालते हैं
अपने मन की
बना डालते हैं
नये दुश्मन
अपने शब्दों से
शब्दों में छिपे
अर्थों से
कर देते नाराज़
अपने राजदारों को
फिर भी
चलते रहते हैं
नुकीले-कंटीले रस्तों पर
नये विरोधियों की
खोज में।

~यशवन्त यश©

13 November 2015

कुछ लोग-31

अपने कुतर्कों को
तर्क कहने वाले
कुछ लोग
चाहते नहीं
निकलना
अपने आस-पास की
अंधेरी गलियों से
क्योंकि उन्हें भाता नहीं
कोई सच बताने वाला
रोशनी दिखाने वाला .....
और क्योंकि
वह संतुष्ट हैं
अपनी सीमित दुनिया में
असीमित
मुखौटों के भीतर।

~यशवन्त यश©

09 November 2015

कुछ लोग -30

घमंड में चूर
कुछ लोग
जब निकलता देखते हैं
जनाजा
अपनी हसरतों
और दिल में
दबे अरमानों का.....
एहसास
तब भी नहीं कर पाते
कि यह क्या हुआ
और क्यों हुआ
खुली और बंद आँखों से
बस देखते रह जाते हैं
टूटना
अपने तिलिस्मों का......
उधार का जादू लिए
हाथों में उपहार लिए
ऊँघते-अलसाए हुए से
अपनों से बे कदर-
बे सबर 
कुछ लोग 
यूं ही देखते हैं
दम तोड़ना लौओं का
और बुझना दीयों का। 

~यशवन्त यश©

02 November 2015

कुछ लोग-29

कुछ लोग
धन दौलत से
अमीर लोग
सिर्फ देखते हैं
अपना 'स्टेटस'
हर जगह
हर कहीं
सिर्फ वहीं
घुलते-मिलते
आते हैं नज़र
जहां वह
और उनके अपने
चमकीले पर्दों के भीतर
उड़ाते हैं
कागज की चिन्दियाँ। 

~यशवन्त यश©

01 October 2015

कुछ लोग-28

स्वनाम धन्य
कुछ लोग
जो कहने को
पत्रकार
कलाकार
और न जाने
क्या क्या होते हैं
देश दुनिया की
तमाम समझ होने पर भी
कभी कभी
अपनी टिप्पणियों से
ना समझ लगते हैं।
उनके पास
उनके स्वाभाविक
पूर्वाग्रहों का
असीमित भंडार
रोकने लगता है
सही तरह
सोचने से
और वह
सिर वही लिखते
और कहते हैं
जो देश -समाज
भविष्य के हित से परे
सिर्फ उनके
अपने अहं को
संतुष्ट करता है
सिर्फ उनके
अपने चित्त को
तुष्ट करता है।
हर जगह
अपने कुतर्कों को
तर्क साबित करने में
ऐसे कुछ लोग
बिता देते हैं
वह अनमोल वक़्त
जो
खो चुका होता है
अपनी सार्थकता
सिर्फ
उनकी वजह से। 

~यशवन्त यश©

15 August 2015

कुछ लोग-27

(1)

कुछ लोग
समझते हैं
आज़ादी का
सही मतलब
और आनंद लेते हैं
हर पल का
कभी
कूड़े के ऊंचे ढेरों में
तलाशते हैं
दो वक़्त की रोटी
और अपना भविष्य
कभी फुटपाथों पर
फटेहाल भी
मुस्कुराते हुए
निभाते हैं
खुले आसमान
और ज़मीन से
अपना रिश्ता ।

(2)

कुछ लोग
समझते हैं
आज़ादी को
अपने घर की खेती
जिनका उद्देश्य
कायरों की तरह
छुप कर
करना होता है वार
दूसरों पर
कभी ज़ुबानों से
कभी तीरों से
हर चूकते निशाने को
समझते हैं
अपनी वीरता का दम
हर उल्टे वार से बेखबर
आज़ादी के भ्रम में
धँसते जाते हैं
दलदलों में
कुछ लोग
बहुत समझदारी से
दिखाते हैं खुद को
नासमझ
आज़ादी से।

~यशवन्त यश©

08 August 2015

कुछ लोग -26

वर्णांधता से ग्रस्त
कुछ पढे लिखे
स्थापित लोग
नहीं कर पाते अंतर
व्यंग्य,कविता,
कहानी और लेख में
निकालते हैं मीन मेख
सत्यता को 
बिना देखे
बिना परखे
नाचते हैं 
दूसरों की
कठपुतली
बन कर
और अंततः
अपने भीतर की
ईर्ष्या की
आग में झुलस कर
खुद ही हो जाते हैं भस्म
ऐसे ही कुछ लोग।

~यशवन्त यश©

04 August 2015

कुछ लोग -25

कुछ लोग
पा लेते हैं
सब कुछ
अपने कर्म
और
अपने भाग्य से
वहीं
कुछ लोग
करते रहते हैं
इंतज़ार
किस्मत के
दरवाजे खुलने का
यूं ही
बैठे बैठे
दस्तक देते देते
खुल जाता है
साँसों का दरवाजा
और आँखें
बंद हो जाती हैं
सदा के लिये
कुछ लोगों की। 

~यशवन्त यश©

21 July 2015

कुछ लोग -24

कुछ लोग
जो कभी
अनजान होते हैं
अचानक ही
बन जाते हैं
इतने खास
कि उनके
सुख और दुख
लगने लगते हैं
अपने से .....
और कुछ लोग
जिन्हें हम जानते हैं
लंबे समय से
जुड़े रहते हैं जो
हमसे
अचानक ही
लगने लगते हैं
अनजान
सिर्फ अपने
व्यवहार की वजह से।


~यशवन्त यश©

14 July 2015

कुछ लोग-23

कुछ लोग
बहुत अजीब होते हैं
कभी
खुल कर
बयान करते हैं
अपने जज़्बात
कभी बरसों के
अनजान बन कर
कहीं खो जाते हैं
गुमसुम
असहाय से
कर लेते हैं
खुद को कैद
गहरी खामोशी में
बंद पलकों के भीतर
कुछ लोग
सिर्फ अपने ही
बहुत करीब होते हैं
कुछ लोग 
बहुत अजीब होते हैं। 

~यशवन्त यश©

08 July 2015

कुछ लोग-22

कुछ लोग
सिर्फ याद रखते हैं
अपना आज
और आज में ही
खोए रहते हैं
भूल कर
अपना बीता कल ....
स्वाभिमान से
अभिमान की ऊंचाई से
और ऊंचे उड़ते
कुछ लोग 
जब अचानक
गिरते हैं
तब मुश्किल होता है
उनके लिए
मिटाना 
नाम के आगे लगे
प्रश्न चिह्नों को ।

~यशवन्त यश©

28 June 2015

कुछ लोग -21

पत्थर पर खींची 
अपनी लकीर पर
चलते हुए
कुछ लोग 
अचानक ही
आ पहुँचते हैं
दो राहों पर
कभी कभी
चौराहों पर
जहां उनके नियम
उनके कायदे
डगमगाने लगते हैं
मझधार में फंसी
किसी नाव की तरह
फिर भी
अड़े रहते हैं
अपनी जिद्दी धुन पर ....
उनके निर्णय
निष्कर्ष
और सोच  की
कुंद होती धार
घातक होती जाती है
खुद ही के लिये .....
सब कुछ
जान कर भी
सब से 
अनजान बन कर
कुछ लोग
लगा लेते हैं
प्रश्न चिह्न
अपने नाम के आगे। 
  
~यशवन्त यश©

22 June 2015

कुछ लोग- 20

दोहरे मापदंड
साथ लिए चलने वाले
कुछ लोग
अपने लिए कुछ
और के लिए कुछ और
सोचने-करने वाले
कुछ लोग
गढ़ लेते हैं
एक ही स्थिति-
परिस्थिति की
दो परिभाषाएँ
एक
अपने अनुकूल
एक 
और अपने प्रतिकूल 
ताकि दिखा सकें
क्रूर चेहरे  पर लगा
उदार मुखौटा
और भी बेहतरी से।

~यशवन्त यश©

17 June 2015

कुछ लोग-19

अपनी आदतों से मजबूर
कुछ लोग
जाने -अनजाने ही
चल देते हैं
विध्वंस की राह पर
बिना कुछ सोचे
बिना कुछ समझे
अपने पुरातन
परिवेश के आकर्षण में
भूल जाते हैं
समन्वय
अपने स्वभाव
अपनी ज़िद
अपने पूर्वाग्रहों के
वशीभूत हो कर
कुछ लोग
आनंदित होते हैं
जलती चिताओं से उठतीं
ऊंची लपटें देख कर। 

~यशवन्त यश©
+Get Now!