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23 March 2020

कुछ लोग-47

खुद
सामने आने के बजाय
कुछ लोग
चलते हैं
अपनी चालें
उन ना-समझ मोहरों से
जो होते हैं बे-खबर
प्रत्यक्ष के
परोक्ष से।
पर वो नहीं जानते
कि ये मोहरे ही
अक्सर उनके
विभीषण बनकर
दिखा देते हैं
असत्य के भीतर
कहीं गहरे से दबा
सत्य।
कई उजले मुखौटों के
सौन्दर्य को
दर्पण में निहारते
कुछ लोग
जानकर भी
अनजान बने रहते हैं
कि उनकी
बतकहियों के तूफान में
शांत रहने का अर्थ
आत्मसमर्पण नहीं
सामने वाले का
संकल्प होता है।

-यशवन्त माथुर ©
23/03/2020

15 September 2019

कुछ लोग-46

कुछ लोग 
नहीं चाहते बंधना 
नियमों के 
असीम जाल में 
नहीं चाहते 
फंसना 
क्योंकि 
उनका दायरा 
संकुचित होता है 
चारदीवारी के भीतर 
खुद की 
खुशियों तक 
सीमित होता है। 

कुछ लोग 
नहीं चाहते हैं 
टोका जाना 
रोका जाना 
उनको भाता है 
अतिक्रमण....
लांघ कर 
दूसरों की सीमाएँ
चलते जाना।

और जब 
आता है 
ठहराव का 
अंतिम 
अनचाहा पड़ाव 
तब चाह कर भी 
कुछ लोग 
बंध नहीं पाते 
क्योंकि 
अवश्यंभावी होता है 
एक ही 
नीरस चलचित्र का 
बोझिल सा अन्त। 

-यशवन्त माथुर©
15/09/2019
 

13 June 2019

कुछ लोग -45

चौराहों पर
आते जाते
जीवन धारा की
तेज़ रफ्तार में
मंज़िल तक पहुँचने की
जद्दोजहद में लगे
कुछ लोग
कैसे भी कर के
बस पा लेना चाहते हैं
अपना अंतिम पड़ाव
जिसे छूना
नहीं होता
इतना भी आसान
क्योंकि
ये राहें
ये सड़कें
खुद में समाए हुए हैं
अनेकों गड्ढे और
गति अवरोधक....
इनके किनारों पर
कहीं मिलता है
अतिक्रमण
और कहीं
गंदे,बदबूदार
कूड़े के ढेर....
जिन्हें
पार कर के ही
कुछ चुनिन्दा लोग
उकेर सकते हैं
अपना अंतिम बिन्दु।
.
-यश©
13/जून /2019 

21 March 2019

कुछ लोग-44

अच्छे से जानते हैं कुछ लोग
अच्छे भले दिन को
खराब करने की कला
क्योंकि उन्हें सुहाता नहीं
दो पल का सुकूं
किसी चेहरे पर
इसलिए
रहते हैं
बस इसी ताक में
कि खेलते रहें
सीधे लागने वाले
किसी चेहरे के
जज़्बातों से
बिना कुछ सोचे
बिना कुछ समझे
कुछ लोगों को
ऐसा लगता है
कि बर्दाश्त की सीमा
शायद असीम होती है
कुछ लोगों की।
.
~यश ©
21/03/2019

08 February 2019

कुछ लोग -43

तलाश पाते हैं
सिर्फ कुछ ही लोग
मटमैली चादर के
किसी सिरे पर
कहीं खोई हुई
उम्मीद की
किसी धुंधली सी
रेखा को
लेकिन
अधिकतर
सिर्फ ढोते रहते हैं
उसी स्याहपन को
जो छितराया रहता है 
हर ओर
यहाँ-वहाँ
सिर्फ इसलिए
क्योंकि
नहीं जुटा पाते
हिम्मत
कुछ लोग
अपने सीमित दायरे से
बाहर निकल आने की।

-यश ©
08/02/2019

15 October 2018

कुछ लोग -42

अनेकों
औपचारिकताओं के
लबादे में
ढँके-छुपे कुछ लोग
सिर्फ चाह में रहते हैं कि
बने रहें अच्छे
और सच्चे
औरों की निगाहों में ;
लेकिन;
भूल जाते हैं
कि उनके चेहरे पर लगा
आदर्शवादी मुखौटा
देर से ही सही
पर
जब हटता है
तब साफ दिखने लगते हैं
वो तमाम कील और मुँहासे
जिनसे रिसता है
उनके वास्तविक सच
और चरित्र का मवाद।

अपने 'अभिनय' से
सबको कायल करने वाले
ऐसे लोग
समय रहते ही
पहचान में आ तो जाते हैं
मगर
पहचानने वाले भी
छू लेने देते हैं
उन्हें उनका  फ़लक
क्योंकि
ऊंचाई से गिरने पर
शर्मिंदा अर्श भी
कर लेता है
खुद को और भी कठोर
ताकि
वो कर सकें
एहसास
खुद के दिल
और दिमाग पर पुती
कालिख के
गहरेपन का।

~यश©
15/10/2018
  

13 September 2018

कुछ लोग -41

विरले ही होते हैं कुछ लोग इस तरह के जो,
डूब जाते हैं खुद, पार तिनके को लगा देते हैं।
वो लहरों के साथ-साथ चलते तो नहीं मगर
डगर दुनिया को एक नयी सी दिखा देते हैं ।
उनके आगे क्या अपना– क्या पराया कोई
वो अपनी बातों से हर सोते को जगा देते हैं।
विरले ही होते हैं कुछ लोग इस तरह के जो,
अपनी साँसों से किसी और को जिला देते हैं।
-यश ©
13/09/2018


10 August 2017

कुछ लोग -40

संपर्कहीन
बीते दौर के
कुछ लोग
जिनसे जुड़े होते हैं
हम
अपनी पूरी भावनाओं
और संवेगों के साथ,
संभाले होते हैं
जिनकी स्मृति
और कुछ
स्वर्णिम पल
इस उम्मीद में
कि फिर कभी
कहीं मिलेंगे
इसी जीवन में
किसी नदी के किनारे,
या सड़क पर
कहीं को जाते हुए
या आते हुए-
उनके नाम
जब टकराते हैं
बदले हुए चेहरों -
पर,
उन्हीं हाव-भावों
सहयोग और अपनेपन
के साथ,
तब ऐसा लगता है
जैसे
तेज़ भागते वक़्त को भी
होती है कद्र
कुछ लोगों के
भीतर के
एहसासों की।
.
-यश©

16 July 2017

कुछ लोग -39

बने रहो पगला
काम करेगा अगला की
तर्ज़ पर
'बैल बुद्दि' वाले
कुछ लोग
अपने प्रतिउत्तरों से
निरुत्तर करने की बजाय
खेल जाते हैं
उल्टे दांव।
ऐसे कुछ लोग
न जाने
किस सोच मे डूबे हुए
सिर्फ खुद को सही
और ज्ञाता मानते हुए
अपने पूर्वानुमानों को ही
सबसे सही बताते हुए
बस किसी तरह ही
रख पाते हैं काबू
अपने भीतर के शैतान को।
'बैल बुद्दि' वाले
कुछ लोग
मजबूर होते हैं
अपनी आदतों
और आनुवंशिकी
संस्कारों से
जिनको बदल पाना \
हो नहीं सकता
कभी भी
किसी भी तरह
संभव।
.
-यश©

15 May 2017

कुछ लोग-38

जीवन के
कदम कदम पर
उधार में डूबे हुए
कुछ लोग
क्या क्या
नहीं कर गुजरते
तगादों से
बचने को ।
घूमते हुए
फिरते हुए 
लेकिन
आखिरकार
जब घिरते हैं
चौतरफा
तब समझ आता है
कि
पल पल की
किश्तों से बेहतर
एक मुश्त लेना
और देना ही है।

-यश©

 

15 October 2016

कुछ लोग-37

कुछ लोग
कुछ लोगों को समझ कर
खुद से नीचा
और खुद को
ऊंचा मान कर
न जाने किस गुमान में
हरदम खोए रह कर
सोए रहते हैं
गहरी नींद में
जो जब टूटती है
तब एहसास दिलाती है
उस अंतर का
जो होता है
घमंड
और स्वाभिमान में
शैतान
और इंसान में
पर उस अंतर को समझने में
हो जाती है कभी कभी देर
कि बस अपने अंधेरे में
खोए रह जाते हैं
कुछ लोग
हमेशा के लिए।

~यशवन्त यश ©

12 March 2016

कुछ लोग-36

अंध भक्ति के
रोग से ग्रस्त
कुछ लोग
अंतर नहीं कर पाते
सही और गलत का
कल्पना और
वास्तविकता का
जिंदा और मुर्दा का
आसमान और ज़मीन का .......
ऐसे लोग
हाथ मे सिर्फ लट्ठ लिए
हर पल तलाश मे रहते हैं
उस शिकार की
जो कर नहीं पाता सहन
उनके एकाकी मिथ्या
प्रलाप को......
कुछ लोग
सिर्फ खुद को
खुदा मानते हैं
हर कानून से ऊपर
हर नियम
हर अदालत से ऊपर
सिर्फ वो
उनका लट्ठ
और उनका निर्णय ही
सहिष्णु होता है
और जो वास्तव में
सच होता है
वह उनकी निगाह और
वर्चस्व में
गलत होता है।

~यशवन्त यश©

11 January 2016

कुछ लोग-35

कुछ लोग
अपनी हर बात
जरूरी समझते हैं
बिना उसकी
तह और गहराई में जाए
सिर्फ किनारे पर
खड़े रह कर
नापना चाहते हैं
भूगोल
नदी और सागर का
पर क्या
सिर्फ बातों से
नापा जा सकता है
सब कुछ ?
कुछ लोग
धरातल पर आए बिना
बस उड़ते रहते हैं
यूं ही
इसी तरह ।

~यशवन्त यश©

03 December 2015

कुछ लोग 34

मतलब
निकल जाने के बाद
अपने मन की
हो जाने के बाद
दोस्त के मुखौटे में छुपे
कुछ दगाबाज लोग
दिखाने लगते हैं
अपने असली रंग ।
उन्हें नहीं मतलब होता
उनके पिछले दौर
और
आज की कठिनाइयों से
उन्हें
सिर्फ मतलब होता है
टांग खींचने से ।
ऐसे लोग
जानते हैं सिर्फ एक ही भाषा
पद,पैसे,
पहुँच और परिचय की
लेकिन नहीं जानते
तो सिर्फ यह
कि आने वाला कल
उनकी ही तरह पलटी मार कर
उनके साथ भी कर सकता है वही
जो वह कर रहे हैं आज
औरों के साथ।

~यशवन्त यश©

30 November 2015

कुछ लोग-33

अपना दिमाग लगाए बिना
फर्जी रिश्तों के जाल में फाँस कर
कभी भाई बना कर
कभी बहन बन कर
कुछ लोग
अपना उल्लू सीधा होते ही
खड़ी कर लेते हैं अपनी दुकान
दूसरों के दिमाग से।
वही अवधारणा
वही परिकल्पना
वही भाषा
वही चेहरे
और वही मोहरे
लेकिन नहीं
तो केवल वह बहाने
वह अवकाश।
वह आज मुक्त हैं
आनंद में हैं
सीधेपन को
बेवकूफी समझ कर
खुद को पीछे रख कर
औरों से भिड़ा कर
कुछ लोग
आज के आनंद में
भूल जाते हैं
अपना बीता हुआ
कल।

~यशवन्त यश©

25 November 2015

कुछ लोग-32

कुछ लोग
बिना लाग लपेट
कह डालते हैं
अपने मन की
बना डालते हैं
नये दुश्मन
अपने शब्दों से
शब्दों में छिपे
अर्थों से
कर देते नाराज़
अपने राजदारों को
फिर भी
चलते रहते हैं
नुकीले-कंटीले रस्तों पर
नये विरोधियों की
खोज में।

~यशवन्त यश©

13 November 2015

कुछ लोग-31

अपने कुतर्कों को
तर्क कहने वाले
कुछ लोग
चाहते नहीं
निकलना
अपने आस-पास की
अंधेरी गलियों से
क्योंकि उन्हें भाता नहीं
कोई सच बताने वाला
रोशनी दिखाने वाला .....
और क्योंकि
वह संतुष्ट हैं
अपनी सीमित दुनिया में
असीमित
मुखौटों के भीतर।

~यशवन्त यश©

09 November 2015

कुछ लोग -30

घमंड में चूर
कुछ लोग
जब निकलता देखते हैं
जनाजा
अपनी हसरतों
और दिल में
दबे अरमानों का.....
एहसास
तब भी नहीं कर पाते
कि यह क्या हुआ
और क्यों हुआ
खुली और बंद आँखों से
बस देखते रह जाते हैं
टूटना
अपने तिलिस्मों का......
उधार का जादू लिए
हाथों में उपहार लिए
ऊँघते-अलसाए हुए से
अपनों से बे कदर-
बे सबर 
कुछ लोग 
यूं ही देखते हैं
दम तोड़ना लौओं का
और बुझना दीयों का। 

~यशवन्त यश©

02 November 2015

कुछ लोग-29

कुछ लोग
धन दौलत से
अमीर लोग
सिर्फ देखते हैं
अपना 'स्टेटस'
हर जगह
हर कहीं
सिर्फ वहीं
घुलते-मिलते
आते हैं नज़र
जहां वह
और उनके अपने
चमकीले पर्दों के भीतर
उड़ाते हैं
कागज की चिन्दियाँ। 

~यशवन्त यश©

01 October 2015

कुछ लोग-28

स्वनाम धन्य
कुछ लोग
जो कहने को
पत्रकार
कलाकार
और न जाने
क्या क्या होते हैं
देश दुनिया की
तमाम समझ होने पर भी
कभी कभी
अपनी टिप्पणियों से
ना समझ लगते हैं।
उनके पास
उनके स्वाभाविक
पूर्वाग्रहों का
असीमित भंडार
रोकने लगता है
सही तरह
सोचने से
और वह
सिर वही लिखते
और कहते हैं
जो देश -समाज
भविष्य के हित से परे
सिर्फ उनके
अपने अहं को
संतुष्ट करता है
सिर्फ उनके
अपने चित्त को
तुष्ट करता है।
हर जगह
अपने कुतर्कों को
तर्क साबित करने में
ऐसे कुछ लोग
बिता देते हैं
वह अनमोल वक़्त
जो
खो चुका होता है
अपनी सार्थकता
सिर्फ
उनकी वजह से। 

~यशवन्त यश©
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