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25 December 2014

आया सेंटा आया सेंटा

 आप सभी को क्रिस्मस पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ !
 owo 18122014

25 December 2013

सेंटा हमें बताओ ना .....

सभी स्नेही पाठकों को क्रिस्मस की हार्दिक शुभकामनाएँ !

Image curtsy :google search
मचल रही बच्चों की टोली
क्या लाए हो भर के झोली
सेंटा हमें बताओ ना
खुशियाँ यहाँ बिखराओ ना

परी लोक सी चमकी  धरती
महकी धरती चहकी धरती 
और सुंदर इसे बनाओ ना
हरियाली सजाओ  ना

हम सच्चे हैं,छोटे बच्चे हैं
काले-गोरे हम ही अच्छे हैं
हम को  कुछ समझाओ ना
रंगभेद को मिटाओ ना

क्रिस्मस का दिन है, बड़ा दिन है
तुम्हारा बहुत ही बड़ा दिल है
तुम भी नाचो गाओ ना
हम में घुल मिल जाओ ना

हर बोली में दुनिया बोली 
क्या लाए हो भर के झोली
सितारे ज़मीं पे लाओ ना
सेंटा हमें बताओ ना

~यशवन्त यश©

इस रचना के लिये फेसबुक पर बाल उपवन ग्रुप की ओर से प्रदत्त प्रमाण पत्र -



02/01/2014

25 December 2012

अगर कुछ दे सको तो ........

सेंटा !
सुना है
तुम बिना मांगे
अपनी झोली से निकाल कर
खुशियाँ बांटते हो 
मुस्कुराहटें बांटते हो
और निकल लेते हो
अपनी राह
बिना कुछ कहे
बिना कुछ सुने

पर
आज
मैं मांगुंगा
और तुम्हें देना होगा
सिर्फ मुस्कुराओगे नहीं
तुम्हें बोलना भी होगा

तो सुनो
इस क्रिसमस पर
पुरुष के मन को
लज्जा ,शील, सौंदर्य
और कोमलता से भर कर
स्त्री के मन को
दृढ़ता
और बाहुबल से भर कर
दोनों की आँखों को 
सहानुभूति की नज़र
देकर 
घुमा दो अपनी
जादू की छड़ी
और बदल दो
भोग पर आश्रित
इंसानी सोच को

सुना तो ये भी है
कि बच्चों पर
जान छिड़कते हो तुम
तो
कुछ ऐसा भी कर दो
कि नन्हें अधरों की
भोली मुस्कुराहट
बनी रहे हमेशा

सेंटा!
अगर कुछ दे सको तो
पूरी कर देना
बस इतनी सी चाह
इस क्रिसमस पर !

©यशवन्त माथुर©

25 December 2011

अंकल सेंटा नहीं जाना (बाल कविता )

आप सभी को क्रिसमस की ढेर सारी बधाइयाँ। इस अवसर पर प्रस्तुत है बाल कविता लिखने का मेरा पहला प्रयास-


दूर देश से आ कर के
झोली भर खुशियाँ दे जाना
अबकी बार जो आए तो
अंकल सेंटा नहीं जाना।
(चित्र:साभार गूगल इमेज सर्च )

ज़िंगल बेल्स की प्यारी धुन 
और क्रिसमस ट्री सजा हुआ है
दुनिया का कोना कोना 
स्वप्नलोक सा बना हुआ है।

नहीं रहे कहीं जात धर्म
रंगभेद दूर हटा जाना
गुरबत मे जीने वालों को
एक नयी राह दिखा जाना।

हम मानव हैं मानव बनें 
माँ बहनों का सम्मान करें 
मिलजुल रहें दुनिया के वासी
नहीं खुद पर अभिमान करें। 

और कुछ चाहिये नहीं हमको
बस संकल्प नेक करा जाना
और जब तक कोई समझ सके ना
अंकल सेंटा नहीं जाना।

~यशवन्त यश ©  

25 December 2010

सेंटा क्लॉज़!

सेंटा क्लॉज़!
मुझे यकीन है
तुम आओगे
खुशियों से भरी
अपनी झोली ले कर

मैं जानता हूँ
तुम मेरे पास भी आओगे
हाथ मिलाओगे
मुस्कुराओगे
अपनी बर्फ सी  सफ़ेद दाढी पर
हाथ फिराकर
मुझे भी पकड़ा दोगे
थोड़ी सी खुशियाँ
मगर आज मैं तुम से कहना चाहता हूँ
कुछ
जो सोच कर रखा है मन में
बस इसे प्रार्थना कहो या जो कहो
पर अलविदा कहने से पहले
एक नज़र डाल लेना
तुम्हारी राह में पड़ने वाले
अनगिनत चौराहों पर
जिनके किनारे
रहते हैं वो नन्हे से नंगे मासूम
जो ठिठुर रहे हैं
माँ के आँचल में छुप कर
जाते जाते
एक मुस्कराहट उन्हें दे जाना
दे देना वो ख़ुशी वो हँसी
वो जिसके हकदार हैं
मुझे कर्ज़दार समझ लेना अपना
अगर एक काम और करो तो
पेट में मार दी जाने वाली
सब नारियों को अगर जिला सको तो

सेंटा क्लोज़ !
तुम अगर ये कर सके तो
यही ख़ुशी होगी मेरी
मैं तुम्हारी झोली में बार बार  झाँक रहा हूँ
आज बस यही उपहार मांग रहा हूँ.


 (सभी पाठकों और शुभचिंतकों को क्रिसमस की शुभ कामनाएं.) 
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