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01 March 2014

पौधे से सीखो





उठ जाओ कितने ही ऊपर
देखो चाहे गगन को छूकर
जुड़े रहना धरती से देखो
बच्चों ! प्यारे पौधे से सीखो।

वो तुम से कुछ नहीं लेता है
फल फूल हवा भी देता है
उसको स्वार्थ का पता नहीं
वृक्ष बन कर छाँव बिखेरता है ।

दुख जीवन के सभी झेल कर
आँधी औ तूफानों से खेल कर
सीना तान कर जीना देखो
बच्चों ! प्यारे पौधे से सीखो।


~यशवन्त यश©

25 December 2013

सेंटा हमें बताओ ना .....

सभी स्नेही पाठकों को क्रिस्मस की हार्दिक शुभकामनाएँ !

Image curtsy :google search
मचल रही बच्चों की टोली
क्या लाए हो भर के झोली
सेंटा हमें बताओ ना
खुशियाँ यहाँ बिखराओ ना

परी लोक सी चमकी  धरती
महकी धरती चहकी धरती 
और सुंदर इसे बनाओ ना
हरियाली सजाओ  ना

हम सच्चे हैं,छोटे बच्चे हैं
काले-गोरे हम ही अच्छे हैं
हम को  कुछ समझाओ ना
रंगभेद को मिटाओ ना

क्रिस्मस का दिन है, बड़ा दिन है
तुम्हारा बहुत ही बड़ा दिल है
तुम भी नाचो गाओ ना
हम में घुल मिल जाओ ना

हर बोली में दुनिया बोली 
क्या लाए हो भर के झोली
सितारे ज़मीं पे लाओ ना
सेंटा हमें बताओ ना

~यशवन्त यश©

इस रचना के लिये फेसबुक पर बाल उपवन ग्रुप की ओर से प्रदत्त प्रमाण पत्र -



02/01/2014

25 December 2011

अंकल सेंटा नहीं जाना (बाल कविता )

आप सभी को क्रिसमस की ढेर सारी बधाइयाँ। इस अवसर पर प्रस्तुत है बाल कविता लिखने का मेरा पहला प्रयास-


दूर देश से आ कर के
झोली भर खुशियाँ दे जाना
अबकी बार जो आए तो
अंकल सेंटा नहीं जाना।
(चित्र:साभार गूगल इमेज सर्च )

ज़िंगल बेल्स की प्यारी धुन 
और क्रिसमस ट्री सजा हुआ है
दुनिया का कोना कोना 
स्वप्नलोक सा बना हुआ है।

नहीं रहे कहीं जात धर्म
रंगभेद दूर हटा जाना
गुरबत मे जीने वालों को
एक नयी राह दिखा जाना।

हम मानव हैं मानव बनें 
माँ बहनों का सम्मान करें 
मिलजुल रहें दुनिया के वासी
नहीं खुद पर अभिमान करें। 

और कुछ चाहिये नहीं हमको
बस संकल्प नेक करा जाना
और जब तक कोई समझ सके ना
अंकल सेंटा नहीं जाना।

~यशवन्त यश ©  
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