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04 October 2010

मधुशाला

हाय क्यों छीन लिया तुमने
मुझ से मदिरा का प्याला
जिसको पीकर  क्षणिक भूलता
दुनिया का गड़बड़ झाला
एक पल की ये रंग रेलियाँ
फिर दो पल की तन्हाई है
तन्हाई में गले लगाती
मुझ को मेरी मधुशाला

(जो मेरे मन ने कहा.....)

20 September 2010

मधुशाला...

आज फिर मन मचल रहा है
मय का प्याला पीने को
दबी छुपी कुछ बातें मन की
मधुशाला में कहने को
दुनिया में कोई नहीं है
मेरी थोड़ी सुनने वालाअपनी कुछ न कहती मुझ से
सुनती मुझ को मधुशाला.

17 September 2010

ले चलो मधुशाला मुझ को

ले चलो मधुशाला मुझ को
मुझ को मधु रस पीना है
जैसे जीते और झूमते
मुझ को वैसे ही जीना है.
नहीं चाहना नहीं तमन्ना
ध्येय नहीं,अर्थहीन है जीवन
जिसको  किया सर्वस्व समर्पित
वही नहीं,है विरहापन
किसे बताऊँ अपनी वेदना
कोई नहीं सुनने वाला है
मेरा साथी,मेरा साकी
मेरी केवल मधुशाला है.



19 June 2010

आज फिर मन .....

आज फिर मन मचल रहा है,
मदिरालय में जाने को.
दो घूँट पी कर साकी के,
गैरों  संग  झूम जाने को.
रिश्ते नाते दुनियादारी,
चाहता हूँ भूल जाने को.
जिनसे कुछ न लिया दिया,
आते वही गले लगाने को.
तन्हाई में विष का प्याला,
तड़पता अमृत कहलाने को.
अधर कहते कदम ताल कर,
मधुशाला में जाने को.
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