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15 August 2018

अगर आज़ाद हैं हम तो क्यों .......

अगर आज़ाद हैं हम  तो क्यों
इंसान बाज़ारों में बिकता है ?
अगर आज़ाद हैं हम  तो क्यों
बचपन फुटपाथों पर दिखता है?
अगर आज़ाद हैं हम  तो क्यों
कोई दर-दर भटकता है ?
अगर आज़ाद हैं हम  तो क्यों
सड़क किनारे सोता है ?
अगर आज़ाद हैं हम  तो क्यों
कठुआ-मुजफ्फरपुर होता है?
अगर आज़ाद हैं हम  तो क्यों
इंसानियत का कत्ल होता  है?
अगर आज़ाद हैं हम  तो क्यों
अपनी नीयत बदली हुई ?
अगर आज़ाद हैं हम  तो क्यों
है आग दहेज की लगी हुई ?
अगर आज़ाद हैं हम  तो क्यों
बेड़ियाँ अब भी जकड़ी  हुईं ?
अगर आज़ाद हैं हम  तो क्यों
हैं अफवाहें फैली हुईं ?
अगर आज़ाद हैं हम  तो क्यों
हैं फिज़ाएँ बदली हुईं?

 -यश©
12/08/2018

15 August 2017

तिरंगे में पुते चेहरे दिखने लगे हैं

तिरंगे में पुते चेहरे दिखने लगे हैं 
तिरंगे फिजा में लहरने लगे हैं 
ये कुछ पल का नज़ारा है मानो न मानो 
फिर तो बस शाम को बुहरने लगे हैं 

करके सुबह सलाम,बस इतना सा करना
चूने की सड़कों पे संभल संभल के चलना 

न आए पैरों तले, न बेकद्री से बिखरे 
मेरा देश और ये झण्डा खूब खुशियों से निखरे 

-यश-©

आप सभी को स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ !
खुद को सावधान रखें...तिरंगे का मान रखें !

15 August 2013

स्वतन्त्रता दिवस पर


सच बोलो तो जेल मिलेगी
झूठ बोलो तो आज़ादी
ईमानदारी की ऐसी तैसी
बेईमान काटते हैं चाँदी

कटोरा हाथ मे लिये फिरता बचपन
लोट लगाता सड़कों पर  
जब भी देखता चमक दमक
तब रोता अपनी किस्मत पर

आती जाती हर नारी को
घूरती नज़रें खा जाने को
दुर्योधन सब बने घूमते
नहीं कृष्ण लाज बचाने को 

फुटपाथों पर जिंदगी मिलती
कूड़े के ढेर पर आज़ादी
जन गण मन की इसी धुन पर
कहीं विलासिता कहीं बर्बादी

फिर भी आज है जश्न
अरे देखो नयी गुलामी का
जो पाया सब खो दिया
मोल न समझा कुर्बानी का।

~यशवन्त माथुर©
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