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26 March 2013

अपने मियां मिट्ठू बन लूँ

इस होली पर रंग बिरंगी
पोस्टों में से कुछ को चुन लूँ
चुन चुन चुग चुग कर पढ़ कर
एक पन्ने पर सब को धर कर 
रंग बिरंगा कवर बना कर
उस पर अपना नाम सजा कर
एक किताब की रचना कर लूँ
अपने मियां मिट्ठू बन लूँ।

पीकर गुझिया,ठंडाई खा कर 
और मिठाई में भांग मिला कर
गुब्बारों मे चाशनी भर कर
जो गुजरे मूंह मीठा कर दूँ
अपने मियां  मिट्ठू बन लूँ।

इस होली पर रंग बिरंगी
पोस्टों में से कुछ को चुन लूँ
इधर उधर की सुन सुन कर के
थोड़ी देखा देखी कर के 
मन भर कागज रद्दी कर के
कर सहित कुल कीमत बिक लूँ
या दुकान पर यूं ही सज कर
अपने मियां मिट्ठू बन लूँ। 

(आप सभी को होली शुभ और मंगलमय हो)

~यशवन्त माथुर©

20 March 2011

एक पत्र

माई डियर मैं,
कहीं तुम तो बौराये हुए नहीं हो?मुझे कुछ शक है वो इसलिए कि इस बार आम यूँ तो देर से बौराया है लेकिन अपने से श्रेष्ठ खास लोगों की तरह कहीं तुम जैसा आम न बौरा गया हो इस होली पर.वैसे एक बात तो है तुम आम हो ही नहीं सकते क्यों कि देखने में तुम सूखी पतली सी  डंडी को भी पीछे छोड़  देते हो ; खाने पीने की तुम्हें कोई कमी नहीं है पर तुम तो यार बस तुम ही हो. तुम खास भी  नहीं हो सकते जो भी लिखते हो ,बोलते हो सिरे से बकवास है हाँ तुम्हारी किस्मत कुछ  खास है कि इतने अच्छे अच्छे लोग  तुम्हारे साथ हैं.लेकिन मेरी भी खासियत देखो मुझे लगता है मैं तुम्हारी खिंचाई कुछ अच्छी तरह से कर सकता हूँ.

और बताओ क्या हो रहा है? मैं जानता हूँ तुम यही कहोगे कुछ खास नहीं.हाँ जो खास नहीं वो खास कर भी कैसे सकता है.और हाँ कभी अपने को खास समझने की गलती करना भी मत देख रहे हो न भारत की करकट;ओह्ह माफ करना क्रिकेट टीम को .दुनिया की सबसे खास बैटिंग टिकी हुई है सिर्फ दो खास पर सचिन और सहवाग पर और साढे ग्यारह (सारे ग्यारह)अपने को पूरे बारह समझने लग रहे हैं.कहीं तुम यही न कर बैठना .दो बकवास में एक खास के आनुपातिक समीकरण से लिखते चलते हो और समझते हो अपने को राजा.जबकि असलियत में तुम अपना ही बाजा बजा रहे होते हो.अरे राजा समझना ही है तो ए राजा को समझो और सीखो .लेकिन सब बेकार है तुम्हारे आगे-एक कार तो है नहीं तुम्हारे पास.

खैर मैं अब तुम को और नहीं झेलाउँगा.एक काम करो यहाँ से निकल चलो .कहीं ऐसा न हो इस होली पर रंग के बजाये तुम को सड़े टमाटर ईमेल और टिप्पणी से भेजे जाएँ और तुम गाने लगो -
मैंने सोचा न था ...मैंने सोचा न था ...

अपना ख्याल रखना.

होली की शुभ कामनाओं के साथ -
तुम्हारा अपना
मैं

19 March 2011

वो बीती होली....

वो बचपन की होली
दोस्तों संग ठिठोली
वो मस्ती वो उल्लास
वो अबीर वो गुलाल
गुब्बारों की मार
पिचकारी की फुहार
वो गुझियों पर टूट पड़ना
और ठूंस ठूंस कर खाना
बे फ़िक्र होकर घूमना
ठंडाई के लिए लड़ना
और हंसना
भांग के नशे में झूमते
हुडदंगियों को देख कर

वो रंगे पुते चेहरे
जो एहसास कराते
बीस दिनों तक
होली की ताजगी का

याद  आते हैं वो दिन
जो अब  दुर्लभ हैं
होली अब भी है
पर बेशर्म हुडदंग हैं
और उत्साह
कुछ घंटों का है
क्योंकि
सब व्यस्त हैं
घड़ी की सुइयों से
तेज चलने की
राहें  तलाशने में!

आप सभी प्रबुद्ध पाठकों को सपरिवार होली की हार्दिक शुभकामनाएं !
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